Thursday, November 14, 2013

उत्तर-मध्य में मच के रहेगी उथल-पुथल!

विधान सभा चुनाव के लिए जबलपुर उत्तर-मध्य क्षेत्र इस बार अपने आप में लोगो की नज़र में चर्चा का विषय बना हुआ है. वैसे देखा जाये तो, यहाँ कोई नया चेहरा नहीं है. दोनों बड़ी पार्टियों ने वही पुराने चेहरों को मैदान में उतारा है. इस बार ख़ास यह है कि यहाँ से स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने वालों की अधिकता है, जिसमे एक महिला पार्षद भी है. इसके साथ ही इस इलाके से किन्नर हीराबाई भी मैदान  में है. ये दोनों पहले भी चुनाव लड़ चुकी हैं.
इस बार इस इलाके के कई वोट इधर उधर होने कि गुंजाइश बनी है. बड़ा कारण ये है कि बीजेपी के प्रत्याशी खिलाफ पार्टी में बगावत के स्वर सुनने मिल रहे है, वही कांग्रेस के प्रत्याशी के खिलाफ भी क्षेत्र की जनता के मन में काफी रोष है. इसके साथ ही स्वतंत्र महिला प्रत्याशी ने अपने इलाके में अपनी एक अलग पहचान  बनाई हुई है, वही किन्नर समुदाय के वोट का फ़ायदा हीराबाई को मिलेगा. उनके पार्षद रहते किये गए कामो का फ़ायदा उन्हें इस समय मिल सकता है.
बीजेपी के प्रत्याशी को भले ही पार्टी ने चुनाव का टिकट दे दिया है लेकिन उन्होंने अपने 10 साल के कार्यकाल में अपनी जनता के लिए ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे जनता उन्हें वोट दे. लोगों से हुई बातचीत में जनता की राय यह है कि -अब नहीं. इस शराबी को इस बार वोट नहीं देना, इसने सिर्फ अपना भला किया है जनता को बेवक़ूफ़ बनाया है. वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार ने भी कुछ ख़ास नहीं किया. उनके भी अपनी पार्टी के साथ मनमुटाव शुरू से रहे हैं. जो अपनी पार्टी का नहीं हुआ वो हम जनता का क्या होगा. 10 साल में इनके तो दर्शन भी दुर्लभ थे, ये तो ये, जो विधायक बने उनके भी.
तो अब बचे स्वतंत्र उमीदवार, इनमें से भी कुछ की छंटनी सोमवार को हो जायेगी, तब कहीं जा कर पूरा समीकरण सही तरीके से समझ में आएगा. अन्य पार्टियो के उम्मीदवारों के हिस्से में जो वोट जायेंगे उससे भी इस बार दोनों बड़ी पार्टियों को फर्क पड़ेगा. इस इलाके में अधिकांश लोगों का इरादा नोटा बटन दबाने का बन रहा है.
एक नज़र इस इलाके पर
ये इलाका मुस्लिम, जैन और सभी समुदायो के साथ व्यापार का मुख्य केंद्र है. इस इलाके में 10 साल में आज तक कोई भी तरक्की नहीं हुई. यहाँ न तो पार्किंग की व्यवस्था है, न ही  चौड़ी सड़को का जाल. आये दिन यहाँ ट्रैफिक की समस्या मूंह खोले रहती है. व्यापारिक इलाका होते हुए यहाँ सुरक्षा के कोई इंतज़ाम नहीं है. बाज़ार में एक भी सुलभ शौचालय नहीं है, जनता को परेशानी का सामना करना पड़ता है. विधायक मद का इस्तेमाल नहीं हुआ, कारण इलाका नगर निगम के अंतर्गत आता है. ये सब बहाने पर्याप्त है जनता के पास और उनके पास एक बड़ा सवाल ये भी है कि इनको वोट हम क्यों दें?
विधायक का बातचीत का अंदाज़ भी यहाँ के लोगों के गले नहीं उतरता. कुल जमा बात कि इस बार इस सीट पे भी मुकाबला देने के लिए दोनों उम्मीदवारों के सामने जहां नए लोग हैं, वही नोटा का असर भी देखने मिलेगा.

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