Thursday, November 14, 2013

कोई जोर से तो कोई होश में, बिक रहा है सब कुछ यहां, बेमोल राजनीति

 चुनाव में जीतने के लिए जो न करो वो कम हैं. देश से अगर चंदा नहीं मिल रहा तो विदेशो से मंगवाए जा रहे हैं. जितना बड़ा आसामी, मतलब उमीदवार उतने बड़े चोंचले. इसी तरह का हाल हमारे जबलपुर का भी है.
एक नेता जी ने चुनाव की टिकट मिलने से पहले ही इलाके में गांधी जी के कागज़ बटवा दिए और टिकट मिलने के बाद टेंशन में जान चली गयी. पिता कि मृत्यु का फ़ायदा बेटे को हुआ. पार्टी ने टिकट भी दिया और जनता को पिता जी पहले ही खुश कर गए, तो अब उनको कोई चिंता नहीं. पर जनाब एक्टिंग है बेटे की, उसको जब ये कहते हुए सुनो कि दादा के जैसे ही जनता का ख्याल रखूँगा.
वहीं एक निर्दलीय महिला नेत्री का MMS  चुनाव प्रचार के पहले ही चर्चा का विषय बना हुआ है. इसके साथ ही उसके त्रिया चरित्र को लेकर भी विपक्ष और जनता में माहौल गरम है. आज नाम वापस लेने के आखिर दिन सुबह से बाज़ार गरम रहा कि पति ने अभी तक पत्नी के नाम पे बहुत ऐश  किये है, उसका कोई भरोसा नहीं कि शाम तक वो बिक जाये और बीबी का नाम वापस ले ले. कहने वालों का ये भी कहना है कि पति और पत्नी दोनों का चरित्र कोई साफ़ नहीं है.
महिलाओं के लिए जो महिला कल तक एक उम्मीद बनी हुयी थी, आज उसको लेकर महिलाओं में भी गुटरगूं शुरू हो गयी है. इस महिला प्रत्याशी  ने अपना नाम वापस ले लिया है खबर लिखे जाने के पहले ही. अभी अभी आयी ताज़ा खबर के अनुसार पति ने लाखों रुपए लेके बीबी का नाम वापस ले लिया है.
वही पश्चिम इलाके में दारु के साथ कम्बल पिछले चुनाव में मिली थी इस बार तो उसकी आस  में गरीब जनता उम्मीद की चादर लिए बेरहम ठण्ड से दो चार हो रही है. उम्मीद पर दुनिया कायम है. उनको इससे कोई मतलब नहीं कि कौन जीतेगा या कौन हारेगा. उनको ठण्ड से राहत इस चुनाव के बहाने मिल जायेगी और नेता जी की तो वैसे ही वाट लगने वाली है. इस बार वहां से दूसरी पार्टी के उम्मीदवार का परचा अभी से दमदार है. इस बार जनता ने सोच लिया है, न रेत न डम्पर और न चलेगा अब कोई बम्पर. हमको चाहिए बस एक सज्जन सा नेता, जिसका हाथ हमारे साथ, उसको देंगे अपना साथ.
चुनाव आयोग की नज़र बचा के सब जगह नोटों की दीवाली हो चुकी है. कुछ खेल शुरू में खेले जा चुके हैं कुछ सीधे-सीधे नज़रो के सामने खेले जा रहे है. यहाँ हर कोई बिक रहा है, ये खेल वाकई में अब बहुत रोचक बन चला है. आने वाले दिनों में देखना यह है कि अब जो बचे हुए है उनमे से कौन अपना गेम किस दिशा में ले जायेगा.

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