तेरा मेरा नाता है क्या?
तुम देती हो... मै लेता हूं
तुम लेती हो... मै देता हूं
घडी़ घडी़ में रूप है बदलता
समय का पहिया सदा है चलता
हम दोनों में फर्क है कैसा
आपस में एक जैसा है क्या?
मुझे पता है उसे नींद न आई होगी
सपने चल रहें होंगे आंखों में
करवट बदलेगी.. तन्हाई होगी
मुझे पता है उसे नींद आई होगी
उसके सामने वही बादल.. जो मेरे सामने
उसके सामने वही कोहरा.. जो मेरे सामने
उसके-मेरे अर्धविराम भी वही, पूर्णविराम भी
तभी तो मै जब यहां बेचैन हूं
उसकी पलकें भी ना झपकी होंगी
मुझे पता है उसे नींद न आई होगी
सुख-दुख बरसे हम पर जब भी
हंस दिए, कभी रो लिए हम भी
राहें अपनी संग चलतीं हैं
जब चाहे नजरें मिलती हैं
ये किस जनम से लेकर चलें हैं
ये रिश्तों का राज है क्या?
तेरा मेरा नाता है क्या?
ना रिश्ते को हो कोई नाम
दिल से मिलना दिल का काम
अलग-अलग हैं सफर हमारे
फिर भी एक दूजे के हैं सहारे
जब भी मुझको कांटा चुभता है
तेरे दिल में ये दर्द है क्या?
तेरा मेरा नाता है क्या?
Waah.. nice thought..!! pata nai mere dimag ki batti bandh kyu hogai hai..
ReplyDeleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteक्या कहने