Thursday, September 27, 2012

  ज़िन्दगी दोबारा चांस  नहीं देती .......................                                                     .                                                      
                                                                                                   दुनिया  में लोगो को प्यार का मतलब  नहीं मालूम या वो प्यार को सिर्फ एक ही नज़र से देखते है। प्यार के कई रूप है ,ये आप पे  निर्भर करता है की आप उस प्यार को, जस्बात को, किस तरह  जाहिर करना चाहते है। आला तो लोग इस बेहद ही नाजुक मामलो  में  इज़हार करना नहीं जानते या उनको न जाने किस तरह के डर  ने  घेरा हुआ  है, अगर दहसत के साए है तो प्यार जैसे भावना को पनपने  ही न दो न , प्यार करना भी है,जाताना भी नहीं है ,या उसको किसी  और भावना में  बदल के जाहिर करना ,बेहद ही नादानी भरा काम है, इसमे न सिर्फ प्यार करने वाला  खुद को धोका देता है, बल्कि  उस इंसान को भी आसमंजस में  डाल देता है, जो प्यार करता है, जताता है और बाद में  अपने को ठगा सा महसूस करता है, उस डोर  को कैसे बांदना  है पहले ये शिकना  बहुत जरुरी है ,कोई भी रिश्ता बनाए रखा जाए उसके लिए पहले खुद को मजबूत होना होगा ।                                                                                                         जब  हमें कोई अपनाता है तब हम उससे कुछ ऐसे धुत्कारते है, जैसे हमसे ज्यादा अच्छा कोई नहीं।लेकिन हम ये क्यों भूल जाते है की ऐसा ही कुछ कभी हमारे साथ भी हो सकता है।कभी कभी बात बनते बनते बिगड़ जाती है ,और जब बात समझ आती है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है, इसलिए  समय  के साथ अपने मन की बातो को साफ़ करते चलना ,जरुरी हो गया है,जबरन को कोई गाठ किस्से के मन में  रह जाए ,क्या फ़ायदा ,दोस्तों आप सोच रहे होगे की आज इससे क्या हुआ ये प्यार पे lecture  क्यों दे रही है।आजकल के नए बच्चे सिर्फ इंसान के उपरी सुन्दरता देखते ,है न की दिल की सोम्यता या,सुन्दरता, उम्र ,और कमी, अरे दोस्तों ये सब देखके अगर प्यार करना है तो वो प्यार नहीं होता वो बहुत ही छोटे समय के लिए लिया गया आपका adjustment  है जो आप खुद के दिल को धोका  देके करते है,वेल मुझे बहुत दुःख  होता है जब किस्से को प्यार में   तड़पता देखती हु ख़ास कर के उन  दोस्तों को, जो जिससे प्यार करते है, उसको इज़हार भी करते है ,लेकिन बदले में  मिलता है, एक नस्तर चुबोता दर्द ,जिसकी  चुबन आहे बाह गाहे,  कभी न कभी इंसान को अंदर से हिला देती है।वो खुद से दूर हो जाता है।इसलिए अगर इस आग में  जलने की हिम्मत ,,है तो इज़हार करने की हिम्मत करो वरना फ़ालतू का समय इस इम्ह्तिहान में  देने का कोई मतलब नहीं। जलोगे तो सोने के निखर के  बहार आओगे वरना ,अकेले पन की  दुनिया में   अकेले ही रह जाओगे।
तो अब समय है सच को स्वीकार करो , जो मन में  है उसको बोलो ,साफ़ बोलो,इज़हार करो ,सीधे सीधे ,कोई न  नुकुर नहीं,कोई दिखावा नहीं,लेकिन एक जवाब हमेशा अपने साथ लेते हुए की ,जरुरी नहीं की हाँ ही सुनने मिले न सुनने की हिम्मत भी होनी चाहिए ..  प्यार  नाम ही है ,साफ़ ,सरल ,शब्दों   का  दिल की आवाज़ का जो बहुत ही पाक है।।।।।।।
एक बार हिम्मत करो ,ज़िन्दगी दोबारा चांस  नहीं देगी ............................

No comments:

Post a Comment