Saturday, June 16, 2012

यहाँ आज बात मेरे और बारिश की तो है साथ ही उस जीव की भी है .................जो रंग बदलती है अपना ठीक वैसे जैसे इंसान बदलता है अपने परिवेश  की तरह......................................................... .......................................................................मौसम की पहली  बारिश मे भीगने का मजा ही कुछ  और है।और वो भी कुछ ऐसे जीवो के साथ जो आपके घर रोज आते है।आपके साथी जी हा यहाँ मे  बात कर रही हु....एक गिर्गितान की जो आज मेरे साथ भीगी ...उसको इतना  मजा आ रहा था की मैंने भी जोश मे  आके उसके साथ हर बूंदों का मजा लिया ......जबरदस्त गर्मी के बाद पानी की झमाझम नै जैसे मेरे मन को भिगो दिया .....वैसे ही वो उस तपती धरती को भिगोती होगी .......जिसके सीने मे  न जाने कितनो का भार है .....और उस पे ये गर्मी की तपन जो  उसको अन्दर से पूरा निचोड़ चुकी  होती है।आज तन के साथ मन भी भीगा ,और घर भी ,मेरा आँगन भी ,और बहुत सारे अरमान भी ,जिन्हें मैंने संजोया था ,वो भी उस गरज बरस के साथ शांत हो गए ....हमेशा की तरह अपने आप को समझाते हुए की ,नहीं अभी समय नहीं आया है ,इन्हें उस धरती के तरह अपने अन्दर दफ़न कर दो ......जब अति हो  जाएगी ....तब ये भी ऐसे कम्पन के साथ बहार आएगा की सब कुछ हिल जायेगा ..कभी  कभी काफी कुछ अनकही  बातो को सहेजना .....दिल को सुकून दे जाता है .........इन बातो के सहारे ,हमारे चंद   लम्हों के सहारे , हम अपनी पूरी ज़िन्दगी जी लेते है ...............यही कुछ मैंने भी किया है अपने दिल के साथ ...................शुक्रगुज़ार हु अपने दिल की जिसने मुझे होसला दिया......मजबूती दी ..........यही कारण है की आज मे उन्मुक्त होके इस बारिश की बूंदों को महसूस कर रही हु....... उसमे खुद से बाते करती मे...... अपने आप को भीगोती मे ......और ये बुँदे अपने मे छुपा लेते है मेरे आंसुओ के पानी को .....घोल लेते है कुछ ऐसे जैसे नमक मे पानी ....................शुक्रिया बारिश ,और शुक्रिया मेरी प्यारी सहेली  गिर्गितान .....बारिश की तरह और तुम्हारी तरह मे भी अब समय पर ही अपना रंग दिखाउंगी .................जिसको भीगना होगा ..........वो भीगेगा वरना मे तो भीग चुकी ..........

2 comments:

  1. बहुत ही अच्छा लिखा है स्नेहा .... लेखनी में दम है

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  2. buhot hi sundar di.... awsome..

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