आज भी जब हम किसी से अपने दिल की कोई बात नहीं कह पाते तो अन्दर ही अन्दर घुटे चले जाते है ........या ये सोचने लगते है की मेरा वो दोस्त या मेरा वो हमसफ़र अपने आप मेरे वो बात समझ जाए जो हम उससे कह नहीं पा रहे ......पर क्यों वो उसको समझे .....आप की भावनाए है ....आपका बयां करने का तरीका ,कुछ अलग हो सकता है।......शायद वो इतना अच्छा हो की वो उसको इतना पसंद आये की जो आप उससे चाह रहे थे उससे कई ज्यादा आपको वो देदे .....पर नहीं यहाँ........... मे बात कर रही हु हम औरतो की .....जो ज़िन्दगी भर इस कसमकस मे रहती है की उनका हमसफ़र आगे से आये उसकी तारीफ करे या उसको प्रेम करता है वो कुछ अलग अंदाज़ मे बयान करे ...........पर तुम क्या चाह रही हो वो मत कहो .........तो ऐसा नहीं होना चाहिए ..............अगर किसी से कुछ लेना है तो पहले देना आना चाहिए ....जो हम नहीं करते .........बस लेने मे माहिर है .....फिर भले ही वो कुछ भी क्यों न हो ....मेरी बहुत ही अच्छी सहेली मनु से मेरे युही चर्चा चली की और बताओ लाइफ कैसे चल रही है ...उसने बताया बहुत बढ़िया ....मैंने कहा सच मे या युही कह दिया मेरा मन रखने के लिए। बोली नही ....सच बता रही हु ..........मेरा सुमित बहुत ही समझदार है ..वो मुझे और मेरे बेटी को इतने अच्छे से संभालता है की मैंने कभी यार शादी के पहले सोचा नहीं था ....स्नेहा जब हमने प्यार किया था तब हम दोनों एक दुश्रे के साथ बहुत ज्यादा समय निकालते है .....फिर उसमे मुझे शादी के लिए कहा तो मुझे नहीं पता था की मे इसके साथ निभा पाउंगी की नहीं ...पर मैंने हा कहा .और शादी की .......तब उसकी कमाए भी ज्यादा नहीं थी ....पर आज वो जैसा भी कम रहा है ...हम दोनों को खुश रखता है ...अभी हाल ही मे मै उससे कुछ नाराज़ हो गए थी .....उसको समझ मे आया ...पर पहले उसने मुझसे मेरा मूड जाना और कहा मनु तुझे क्या हुआ है .....तू मेरे से इस तरह क्यों पेश आ रही है न बात न चीत जब तक तुम मुझे बोलोगी नहीं तब तक मई कैसे समझ सकूँगा की आख़िर क्या हुआ है ...तब मनु नै कहा.... .तुम्हारे पास मेरे लिए समय नहीं है ....सुमित बोला ...नहीं ऐसा नहीं है ... तुम ही बताओ रोज ऑफिस किसके लिए जाता हूँ ...मेरे बेटी और तेरे लिए ही न .....आज मे नहीं कमाऊंगा तो तेरे को कैसे खुश रख पाउँगा ...फिर सन्डे तो अपना है ही ....तेर बिना मई कही जाता भी नहीं ....जब भी जाता हु अपन तीनो साथ होते है .....ये समय देना नहीं है क्या ......मुझे भी लगता है की तुम मुझे समय नहीं देती जब देखो तब बेटी के साथ तो क्या मई भी मुह फुला के बेथ जाओ ......नहीं मे समझता हु ....की तुम्हारे लिए पहले अपनी बेटी है फिर मे ....तो अब गुस्सा छोड़ो और हसो ......मनु नै अपनी बात ख़तम की और मैंने उससे कहा यार ये बात तो तुझे समझ नहीं आयी .....तू पागल है क्या जो इतनी से बात पर उससे गुस्सा हो गए थी ........तब जो मनु नए मुझेसे कहा वो शानदार था ........स्नेहा तुझे क्या लगता है ...मुझे नहीं पता की ये मे नहीं समझी नहीं मुझे ये पता था पर मे ये सब उसके मुह से सुनना चाह रही थी ....की वो मुझे मिस करता है ......बस सुमित नै कहा और मैंने उसे अपने गले लगा लिया ...................यार मतलब ये सब सिर्फ उसके मुह से सुनने के लिए ..................omg
हा हा हा .... खैर मोहब्बत के अनेक रंग होते हैं ... ये भी एक रंग है उन रंगों में से ... कुछ जुदा और कुछ तरतीब से सजाया हुआ
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