Wednesday, April 29, 2015

खतरनाक है औरत।


आज तक सिर्फ लड़की होने के अहसास को जिया था ,उस लड़की को जिसको बचपन से न जाने कितने सारे नियम कानून की पढ़ाई उसकी माँ देती है,आते जाते रिस्तेदार भी दे जाते मनो अपना फ़र्ज़ निभा दिया। उसके बाद स्कूल कॉलेज के संगी साथियो के बीच एक नयी ज़िन्दगी जीने का मौका मिलता है ,उसके बाद जब किसी लड़के की संगत मिलती है तब उसके दिमाग के हिसाब से लड़की खुद को ढालती है ,फिर उसके परिवार के हिसाब से ,फिर जब बच्चे हुए तब उनके हिसाब से ,वो बड़े हुए तब ज़िन्दगी का एक दौर ऐसा आता है जब लगता है की खुद के लिए सोचे लेकिन तब कोई बीमारी आ जकड़ती है ,और फिर एक दिन ये लड़की की इह लीला  खत्म हो जाती है।
लेकिन ऐसा है नहीं ,ये लडकिया ही असल में सब झंझटो की जड़ है ,मैं  लड़की हु ,और बोल रही हु ,की हाँ हम लडकिया बहुत खतरनाक है ,दिक्कत ये है की हम खुद को आज तक जान ही नहीं पाये। हमे जिसने जिस रूप में ढाला  हम ढल गयी। लडकिया नहीं बल्कि उनका दिमाग जो ,जो की लड़को से ज्यादा तेज है ,लेकिन सिर्फ भावुकता के मसले  में वो अपने को निढाल कर देती है ,सौप देती है खुद को किसी के हवाले ,ये सोचके की वो इन्हे संभालेगा ?भैया क्यों ? क्या तुम कभी ये जाना की की आखिर तुम्हारे लिए क्यों पगलाए फिरते है मर्द ?
इनको इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की औरत की भावनाए क्या है ,क्यों वो एक बार में खुद को समर्पित कर देती है। उनको सिर्फ तुमको निहारने से तुमको उल्ल जलूल  कहने से ,तुमको हर बार पे नीचा  दिखाने  में  मजा आता है ,ये वो मर्द है जो दिन भर जब तक औरत सूचक गालिया न दे दे उनको कॉन्फिडेंस नहीं आता ,लेकिन अगर यही गालिया किसी औरत ने दे दी तो इनकी मर्दानगी को चोट लग जाती है। और ये वो मौका होता है जब हम सब लडकिया औरते घटिया ,औरत  के नाम पे  कलंक , और बेहूदा साबित हो जाती है। यहाँ तक की सारी  घटना ,की जिम्मेदार हम हो जाती है ,और तो और हमको गलत साबित करने के लिए ये मर्द हम औरतो का ही सहारा    लेते है। मतलब बहुत ही सोची समझी चाल के तहत खुद को साबित कर किसी के अपने बने रहो और किसी को बदनाम कर दो। वैसे वो गलत भी नहीं है क्युकी हम औरतो को उनकी लत पड़  चुकी  होती है। उनको ये पता है की किस तरह उनको झंझट से निकलना है ,वो गाली गलोच कर के निकल जाते है ,एक दूसरे पे आरोप लगा के पाक साफ़ ,और  दोबारा जिसको गलत कहा उसके साथ नार्मल भी हो जाते है। ये उनकी बहुत बड़ी खासियत है। जो हम औरतो को नहीं आती ,हमे तो कोई कह भर दे की फलानी ने तेरे बारे में ऐसा कहा  फिर देख लो हमारी पूरी एनर्जी लगा देंगे घर रिश्ते एक हो जाते है ,लेकिन साला तब भी मुह से गलत शब्द नहीं निकलते। अब इसे  हार्ड डिस्क का प्रॉब्लम कहो या सॉफ्ट का ,कुछ नहीं हो सकता।
तो जब कुछ हो ही नहीं सकता तो जैसा है वैसा ही रहे। खतरनाक होना ,कहलाना ,और  असली में खतरनाक बनना बहुत फर्क है ,बाकी लोगो का मुझे नहीं पता लेकिन अब एक बात  समझ आ गयी है मुझे की आप लाख कोशिश कर लो कुत्ते की पूछ की तरह किसी की सोच को ,और औरत के औरतपन को नहीं बदल सकते ,हाँ उसका इस्तमाल अपने हिसाब से कर सकते है। 

No comments:

Post a Comment