तुम्हारा अनदेखा सा अनमना सा वो मुट्ठी भर दिल ,
और उसकी वो धक धक करती धड़कन की आवाज़ ,
आज भी मेरे कानो को ,उस पल का अहसास कराती है ,
इसको सुनने की प्रबल इक्शा शक्ति ने मुझे ,
अनहोने मोह की आंच में तापा दिया।
उस कमरे की सनसनाहट और तुम्हारे बकबक की आवाज़ ,
बहार का मौसम ,अजीब सी निडरता ,और साहस का वो अहसास ,
मुझे कही भी ले जा सकता था ,तुम भी बंधे थे ,अधमने से ,
उस पल में बंद मेरी आँखे ,तुम्हारी खुली आँखों से उस याद को जी रही थी ,
जो तुम्हारे दिल और दिमाग को दबोचे हुए थी ,पागल थी में ,उस पल को जीना चाहती थी ,
दिल की दो धड़कनो के बीच कोई एक जगह थी ,जहा कोई पागल नहीं होता ,
मेरा पागल दिल कुछ सोचना ही नहीं चाह रहा था ,वो सिर्फ कमरे की दीवाल ,
को निहार रहा था ,एक टक टकटक ,बोल अलग थे ,दिल कुछ और बोल रहा था ,
कंधे के नीचे माथा टेकी मासूम ,पागल सी वो लड़की उसको रुक रुक के देखती ,
उसका गठा बदन जिसमे कोई रवानी नहीं थी ,जो था वो दिल और दिमाग में चल रही कश्मकश।
वो कब दबे पाँव इसके दिल में घर कर गया पगली को पता नहीं चला ,
उस दिन उन अधूरी सी धड़कनो को सुनके उसको लगा की वो उसके लिए नहीं धड़क रहा है।
वो होले से उठी ,और उसको अधूरे आलिंगन की बजाये पूरा भींच लिया।
उसने कुछ बहुत ही धीरे से निडरता से कुछ कहा जैसे वो सुन ही न रहा हो।
उसने सुन लिया था ,और आगे बाहो को जकड़ते हुए उस सुकून को जताया जिसको
दोनों ने अनमने ,शायद किसी एक ने महसूस किया,मानो दोनों के लिए ये एक भरम था।
और उसकी वो धक धक करती धड़कन की आवाज़ ,
आज भी मेरे कानो को ,उस पल का अहसास कराती है ,
इसको सुनने की प्रबल इक्शा शक्ति ने मुझे ,
अनहोने मोह की आंच में तापा दिया।
उस कमरे की सनसनाहट और तुम्हारे बकबक की आवाज़ ,
बहार का मौसम ,अजीब सी निडरता ,और साहस का वो अहसास ,
मुझे कही भी ले जा सकता था ,तुम भी बंधे थे ,अधमने से ,
उस पल में बंद मेरी आँखे ,तुम्हारी खुली आँखों से उस याद को जी रही थी ,
जो तुम्हारे दिल और दिमाग को दबोचे हुए थी ,पागल थी में ,उस पल को जीना चाहती थी ,
दिल की दो धड़कनो के बीच कोई एक जगह थी ,जहा कोई पागल नहीं होता ,
मेरा पागल दिल कुछ सोचना ही नहीं चाह रहा था ,वो सिर्फ कमरे की दीवाल ,
को निहार रहा था ,एक टक टकटक ,बोल अलग थे ,दिल कुछ और बोल रहा था ,
कंधे के नीचे माथा टेकी मासूम ,पागल सी वो लड़की उसको रुक रुक के देखती ,
उसका गठा बदन जिसमे कोई रवानी नहीं थी ,जो था वो दिल और दिमाग में चल रही कश्मकश।
वो कब दबे पाँव इसके दिल में घर कर गया पगली को पता नहीं चला ,
उस दिन उन अधूरी सी धड़कनो को सुनके उसको लगा की वो उसके लिए नहीं धड़क रहा है।
वो होले से उठी ,और उसको अधूरे आलिंगन की बजाये पूरा भींच लिया।
उसने कुछ बहुत ही धीरे से निडरता से कुछ कहा जैसे वो सुन ही न रहा हो।
उसने सुन लिया था ,और आगे बाहो को जकड़ते हुए उस सुकून को जताया जिसको
दोनों ने अनमने ,शायद किसी एक ने महसूस किया,मानो दोनों के लिए ये एक भरम था।