प्रिय नरेद्र,
इस अभागिन का चरण स्पर्श,
आपको प्रधानमंत्री बनने की कोटिश : बधाई। बीते 46 साल में आपने मुझे भले ही पत्नी का दर्जा नहीं दिया, लेकिन मैंने आपको इस शिखर पर देखने के लिए 40 साल से चावल और इससे बनी चीजों का परित्याग किया है। आपकी सफलता के लिए मैंने मन्नत मांगी थी, जो आज पूरी हो गई। मुझे खुशी है कि आपने अपने जीवन में पहली बार मुझे पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
अब मैं आपके साथ प्रधानमंत्री की पत्नी के रूप में रहना चाहती हूं। सुना है दिल्ली में सात रेसकोर्स रोड पर प्रधानमंत्री का बंगला बहुत खूबसूरत है ? आप मुझे अपने साथ रखेंगे न ? आप हिंदूवाद की बात करते हैं। राजनीति तो परिवारवाद की भी बात करती है। गांधी, नेहरू से लेकर तमाम राजनेताओं ने सत्ता की चाबी परिवार में ही सौंपी। यहां तक कि अटलजी भी इसके अपवाद नहीं हैं। तो फिर आप क्यों अकेले चलने पर आमादा हैं ?
आपकी इस जिद पर मेरे मन में कई तरह के शक उभरते हैं। मीडिया वाले कहते हैं कि आपने एक लड़की की जासूसी करवाई। पहले मुझे अपने भरोसे पर अविश्वास नहीं होता था। लेकिन जब से मीडिया में तिवारी जी की कहानी सुनी है, डर लगने लगता है। कहीं आपके कदम भी तो फिसल नहीं रहे ? देखिए तो, 88 साल की उम्र में भी उन्होंने उज्जवला बहन से शादी की। वे भी कई साल आपकी तरह ना-नुकुर करते रहे। लेकिन आखिर में उन्हें शादी करनी ही पड़ी। कितनी बेइज्जती हुई उनकी।
आप एक बार तिवारी जी से बात कीजिए। मुझे विश्वास है कि आपको उनसे बात करने पर जरूर हौसला मिलेगा। लेकिन दिग्विजय जी से बात नहीं कीजिएगा। मुझे उन पर जरा भी यकीन नहीं। देखिए तो कैसे उन्होंने इस उम्र में एक पत्रकार से अपने रिश्ते की बात कबूली ? ऐसी खबरें पढ़कर मुझे डर लगता है कि कहीं आप भी ....
इतने बड़े प्रधानमंत्री निवास में आप अकेले रहेंगे, यह भी मेरे लिए फिक्र की बात है। मैंने मन्नत मांगी थी कि आपके प्रधानमंत्री बनने के बाद हम दोनों एक साथ अंबाजी के मंदिर जाएंगे।
मुझे पूरा यकीन है कि जिस 56 इंच के सीने को चौड़ा कर आपने मुझे सार्वजनिक रूप से पत्नी स्वीकार किया है, उतनी ही दिलेरी से आप मेरी मन्नत जरूर पूरी करेंगे और भारत के प्रधानमंत्री की पत्नी होने का पूरा हक देंगे।
आपकी अर्धांगिनी,
जशोदा बेन
महेसाणा, 16 मई 2014
अच्छे दिन तो आ गए हैं. जशोदा बेन की ख्वाइश पूरी होती है या नहीं ये देखना है :)
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ReplyDeleteshikha sahi kaha just wait n watch
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