Wednesday, May 7, 2014

माँ तेरे जस्बे और हिम्मत को सलाम।

 गोमा की कहानी उतनी दिलचस्ब नहीं लेकिन उनके जस्बे ,और हुनर की कहानी  बहुत ही दिलचस्ब है ,८५ साल की उम्र में तमाम दिक्कतों के बाबजूद चेहरे पे हसी ,और एक अलग ही नूर ,उनकी संघर्ष शील जीवन की कहानी खुद ही बयान करता है। माँ के पास पड़ोस की आंटी आई की भाभी जी चिप्स और पापड़ चाहिए कोई पहचान का है क्या जो बनाता हो ?माँ ने कहा पता करना होगा ?मेरी माँ की आदत है ,किसी को कुछ कहा है तो उसका काम करवाने की लास्ट मूवमेंट तक कोशिश करती है ,उनके लिए यही मानव सेवा है। जिसको लेकर कभी कभी मुझे गुस्सा जरूर आता है ,की क्या है आप ऐसे लोगो की काम क्यों करवाती है जो सक्षम है ,कर सकते है। लेकिन नहीं ,शायद कुछ काम करने के लिए कुछ विशेष लोगो को जरिया बनाया जाता है।
बहुत सकरी गली में छोटा सा मकान जिसमे अपने १० बच्चो का बचपना देखा और अब उनके पोतो ,पोतियों के साथ रह रही यही गोमा। जी हाँ गोमा पाकिस्तान से यहाँ आई थी ,शादी हुयी मिया के साथ जब तक रही ,दिक्कत ही रही काम काज  नहीं था ,तो बच्चो को  पालने के लिए चिप्स पापड़ बनाना शुरू किया। वो दिन है और आज का दिन, गोमा तब से अपने परिवार को पाल रही है। अपनी ७ लड़कियों की शादी की ,अकेले, फिर बेटो की ,और अब बहुए जो आई है  ,तो साँस के देखभाल करने वाला कोई नहीं। आज भी खुद कमाती है ,पहले बेटे माँ के साथ थे ,बहु के आने के बाद अलग हो गए ,बड़ा बेटा अपने परिवार से अलग हो गया ,छोटा साथ है लेकिन किसी काम का नहीं ,दारु और बुरी आदतो ने बिगाड़ा हुआ है ,बहु रोज लड़ती है ,साँस की देखा देखी शुरू किया पापड़ का काम , लेकिन वो प्यार और जस्बा कहा से लाएगी वो सासुमा के हाथो में है। प्यार की बोली से दिल जीतने की कला कहा ?
गोमा जबलपुर के प्रतिश्ठित  सिंधी परिवार की लड़की है ,लेकिन आज तक इस लड़की ने अपने मायके के लोगो से कोई मद्दत नहीं ली। आज भी माँ के यहाँ जाती है ,और आ जाती है ,उनका काम किये बिना दिन नहीं गुज़रता। जब मैंने उनसे बात की तो बोली ,उसने जीवन दिया है , तो वो पालेगा भी।भरा पूरा परिवार दिया है काहे का अकेलापन ?बच्चे है ,नाती पोतो ,को देख के खुश हो जाती हु ,लड़कियों ने मेरा नाम रोशन किया है सभी अच्छे घरो में है ,आज मुझे उससे ही ख़ुशी मिलती है ,तो क्या हुआ जो आज भी अपना पेट खुद ही पालना पड़ता है। कर्म है ,जो भोग रहे है। 
बस एक बात हमेशा याद रखो बेटा ,काम से जी नहीं चुराना ,और कोई काम छोटा नहीं होता। बस विश्वास रखो ,खुद पे खुद की हिम्मत और जस्बे बे। हुनर  कैसा भी हो उसको कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

ये सीख हर माँ देती है ,लेकिन बच्चे ही नहीं मानते ,काम से जी चुराना ,बड़ो की इज़्ज़त न करना ,खासकर बुजुर्गो की ,आज के समय में इतना ज्यादा हो गया है ,समझ नहीं आता की की युवा पीड़ी कहा जा रही है।
माँ और माँ की सहनशीलता को मेरा सलाम। गोमा को मैंने पूछ ही लिया १० बच्चे कर लिए लेकिन आज भी आपकी ताकत गजब की है। हँसते हुए बोली उस समय पाकिस्तान में थे शुद्ध खाते थे ,पीते थे दूध ,आजकल की लड़कियों को देख लो ,पीसड्डी से है ,उनमे वो ताकत कहा। मैंने पूछा आपका हाथ पैर दर्द नहीं देता इस उम्र में ऊपर नीचे पापड़ डालने जाना ,नहीं अरे तुम जितना काम करना है करा लो। तुम थक जाओगी पर हम नहीं। बेटे जस्बा हो तो थकान  नहीं आती।  सुन के वाकई मुझमे जस्बा जागा की आज ये कहानी लिखनी ही है ,चाहे कुछ भी हो जाए। और लो कहानी हो गयी। एक माँ के अटूट विश्वास ,और जस्बे की कहानी ,अपने बच्चो कीबेरुखी  को हँसते  हुए सहने की कहानी। और सबसे बड़ी बात जो मुझे अच्छी लगी वो ,ये की खुद को अकेला मत समझना। काम करते रहो तो अकेलापन भी डर  के भाग जाता है। गोमा को मेरा सलाम।

इस किरदार से मिलवाने की ज़िद अगर माँ ने न की होती तो आज मुझे जो हिम्मत मिली वो नहीं मिलती। इसलिए मेरी माँ को भी मेरा सलाम।

मदर डे पे इससे ज्यादा ख़ुशी का पल और क्या हो सकता है ,की फुर्सत निकाल के कुछ लिखा एक माँ के लिए।


1 comment:

  1. पेड़ बूढ़ा होने पर भी छाया देना नहीं छोड़ता। मां भी वह पेड़ है, जि‍सकी छांव में पूरा परि‍वार महफूज महसूस करता है। बदले में उसे चाहि‍ए क्‍या, थोड़ा पानी, थोड़ा प्रेम और मां होने का अहसास। अगर लगातार उपेक्षा से महि‍ला के भीतर मां होने का अहसास मर जाए, तो जीवन में कुछ शेष नहीं बचता। सि‍वाय जीवन को ढोने के। गोमा की आपबीती मुझे यही अहसास दि‍ला रही है। अच्‍छा लि‍खा है, पर कसावट के साथ सुनि‍योजि‍त तरीके से लि‍खा जाता तो बेहतर होता।

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