Friday, August 2, 2013

मेरे मुस्कुराने की आदत भी कितनी महंगी पड़ी मुझे ,
भुला दिया सबने मुझे ये कहके की,                                                                                                                     तुम तो 
अकेले भी खुश रह सकते हो ………

कुछ लोग मतलब के लिए खोजते है मुझे ,
बिन मतलब जो आयें तो क्या बात है ,
कतल कर के तो सब ले जायेंगे दिल मेरा ,
कोई चाहत से ले जाये तो क्या बात है …।

लोग डूबते हैं तो समंदर को दोष देते हैं,
मंजिल ना मिले तो किस्‍मत को दोष देते हैं,
खुद तो संभलकर चलते नहीं,
जब लगती है ठोकर तो पत्‍थर को दोष देते हैं।

कही बारिश बरस जाये ,कही दरिया तरस जाये ,
कही आके घटा ठहरे, तुम्हारे और मेरे दरमियाँ आकर खुदा ठहरे ....|
चाँद के साथ कई दर्द पुराने निकले ,
कितने ग़म थे जो तेरे ग़म के बहाने निकले,
दिल ने एक ईंट से तामीर किया था हसीन ताजमहल ,
तूने एक बात कही लाख फ़साने निकले ……।

जाने क्या सोच कर हम तुमसे वफ़ा करते है , 
क़र्ज़ है कोई पिछले जन्म का जो अदा करते है

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