Saturday, February 2, 2013

आखिर कब तक ?      2

सौम्या  की जिंदगी  मे कभी  भी कोई चीज  या ख़ुशी ,उसे  अपने आप आसानी से  नहीं मिली थी ,वो अन्य लडकियों की तरह नहीं थी ,नो डाउट उसने कभी  अपनी ख्वाइशो  को किसी पे लादा  नहीं ,जो मिला उसमे खुश ,कभी कोई जिद नहीं की की उसको ये पसंद है तो उससे यही चहिये ,हर परिस्थिथि मे  खुद को ढाल  दिया ,वो हर किसी के  लिए उस समय इम्पोर्टेन्ट  होती जब लोगो को उससे काम होता ,फिर वो कोई भी क्यों न हो,स्कूल टाइम मे  सब क्लास मेट ,कॉलेज मे  सब दोस्त ,किसी को गर्ल फ्रेंड  पटाने मे  मदद चाहिए होती ,तो  किसी को अपने खुद के  प्रॉब्लम सोल्वे करने मे  ,सौम्या  ने  सब का काम किया, करवाया ,बेबाकी से ,बिना डरे ,वो सब की चहेती भी बनी ,आज भी है ,नो डाउट ,पर अब उसका ये सीधा पन ,उसको अन्दर ही अन्दर कचोटता है ,आज वो न जाने  कितने सारे  अनगिनित सवालों से  घिरी है ,की उसकी साथ ही ऐसा क्यों होता है , बचपन से  लेकर आज जब वो उम्र कई ऐसे पड़ाव मे  है ,आज भी  लोगो का वही सिलसिला जारी है,आते है ,कुछ अपनी कहते है , दूसरो की कहते है ,सब की कहते है ,पर उसकी कोई नहीं सुनता ,न जाने कितनो की कहानी ,बनी कितनो की सुधारी  ,पर वो आज तक अपनी कहानी नहीं बना पायी अनजानी , बेगानी सी ,अपने ही फितूर  के साथ ,अपनी ही स्टाइल मे  जीने वाली लेकिन कोई बात तो है , की उसकी उम्मीद अभी मरी नहीं है ,उसको लगता है ,की कोई नहीं ,तो न सही ,वो अकेली ही सही ,अपनी ज़िन्दगी  जी लेगी ,अपने सो कॉल्ड बतमीजी के 
 साथ ,बिना तमीज के  अड़ियल  स्वभाव के  साथ ,शायद यही एक कारण है की आज उसकी हर बात को मे  कहानी का रूप दे सकू ।

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