Wednesday, August 12, 2015

अनोखे तारो से मुलाकात

संडे की सुबह कुछ ख़ास रही ,वैसे तो मै कई बार बीच गयी थी ,आज के पहले अपनी पत्रकारिता की नौकरी के दौरान तब वैसा कभी महसूस नहीं किया था ,जो बात आज महसूस की या कह लो ,तन मन आत्मा सब भर गयी ,आँशु भी झलक पड़े ,आलम ये है की अभी तक खुद को नार्मल नहीं कर पा रही हूँ। आज मेरे से या हम में से किसी से कोई पूछ ले कोई दिक्कत या तकलीफ बुक्का फुला के रो लेंगे ,सब बता देंगे ,इसने ये किया उसने ये किया , न जाने कितना सब कुछ ,लेकिन जब इन बच्चियों से मैंने ये सवाल किया ,तो वो खिलखिला के हँसी और कहा कुछ नहीं दीदी बस सर दर्द देता है , ये दर्द इनको होगा क्युकी ये बच्चियां देख नहीं सकती। आज मुझे ऐसा भी लगा की कितना अच्छा है की ये दुनिया के बदरंगो से पर है ? हम लोगो से लाख गुना सुखी ,जिनके पास ईश्वर ने सब कुछ दिया है फिर भी दो पल का सुकून नहीं ,हाय ये ,हाय वो, हाय इसका ,हाय उसका ,उसने ऐसा ,तो उसने वैसा में ही सारी ज़िन्दगी निकाल देते है ? उनकी आवाज़ में वो खनक थी ,जो अंदर तक हिला गयी ,सुनी तो पहले भी थी तब शायद कानो से टकरा के चली गयी होगी ,आज कान के रस्ते दिल के अंदर गयी और तांडव सा मचा दिया मन में।
सब लडकिया है ,पढ़ने में जोरदार ,गायन जबरदस्त , डिसीप्लेन छोटी उम्र से बड़ी उम्र तक का जबरदस्त ,कितने कदम में क्या है ,किसको क्या कब देना देना है , किससे कब कैसे बात करनी है , बिना टकराये भीड़ में से खुद को कैसे निकालना है ,हम और आप आँख वाले क्या करेंगे जो आज इन बच्चियों को मैंने करते देखा ? ये है जबलपुर की नेत्रहीन कन्या विद्यालय की बच्चियां ,मौका था वात्सल्य एक्यु हीलर कैंप का जो आज यहाँ लगाया गया था। बड़े बड़े लोग जाते है ,उनके गीत सुनते है ,कुछ दान देते है और आ जाते है। इनको दान की कोई जरुरत नहीं है असल ज्ञान का दान हमको इनसे लेना चाहिए ?बाकियो का मुझे पता नहीं ,अब से ,आज से ,लेकिन मैंने आज जो पाया है वो बहुमूल्य है इनको सहानुभूति नहीं चाहिए ,इनको ज्ञान और सम्मान चाहिए ,रोजगार चाहिए ,महीने की तकलीफ से गुजरने वाली इन लड़कियों को आज जैसे ही पेट दर्द का इलाज़ बताया ,जैसे ही माथे के रोज के दर्द का इलाज़ बताया ,उनके चेहरे खिल उठे ? वो हँसी वो ख़ुशी देख के लगा की आज बहुत कुछ पा लिया।
"किसी का दर्द जो मिल सके तो ले उधार जीना इसी का नाम है ",सही मायनो में आज समझ आया। अब कोई कमी की शिकायत नहीं करुँगी आज से ,जो है, जैसा है, जितना है ,बहुत है।
शुक्रिया वात्सल्य एक्यु हीलर से मेरी गुरु प्रतिमा भाभी और गोल्डी भैया का ,जिनके कारण मुझे आज ये अनुभव हुआ। हर रविवार अब हम ने सोच लिया है की कुछ अनोखे तारो से मुलाकात करेंगे।





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