आजकल ज्यादातर कामकाजी लड़कियों को स्त्रैण गुण वाला पति चाहिए, जो स्त्री की भावनाओं को समझे। सही है। पति को पत्नी के हर सुख दुख को समझना चाहिए, उसके व्यवहार के हर छोटे बड़े पहलू को जानना चाहिए। लेकिन इसका दूसरा पक्ष यह भी है कि स्त्री में भी पुरुष के गुण होने चाहिए।उसे भी पता होना चाहिए कि पति किस बात पर खुश होता है और किस बात पर नाराज। पति को भी बीमार होने पर, दुख में एक साथी की जरूरत पड़ती है। उसे भी अकेलापन महसूस हो सकता है। आंसू उसे भी आ सकते हैं, फिर भला उसकी आत्मा में कितना भी बल हो।जो हृदयवान होगा, वो जाहिर है अपनी बात सोच-समझकर कहेगा। लेकिन वह यह भी उम्मीद करेगा कि उसकी साथी भी सोच समझकर अपनी बात कहे। अगर नहीं कही गई तो उसके दिल को इस कदर ठेस लगेगी कि वह खुदकुशी भी कर सकता है।अगर पत्नी यह चाहती है कि उसके पति को पीरियड की तारीख पता हो या पत्नी के हिलने डुलने भर से यह समझे कि उसे बाथरूम जाना है तो पति भी अपनी पत्नी से एक छोटी सी उम्मीद कर ही सकता है कि किसी दिन दफ्तर से देरी से आने की बात को पत्नी समझे और जल्द घर आ जाए। उसके अकेलेपन को बांट ले। पत्नी को भी पता होना चाहिए कि उसका पति छुट्टी के दिन क्या प्लान कर रहा है और इसमें उसे कितनी मदद करनी चाहिए। लड़कियों को दुनिया का सबसे वफादार कुत्ता चाहिए।उसके कान इतने तेज होते हैं कि उसके हिलने डुलने भर से समझ जाएगा कि मैडम को कहीं जाना है।बीमार होने पर वह उसके पास ही बैठा रहेगा हां, हृदयवान और विचारवान नहीं मिलेगा, पर वह मालकिन को समझेगा और फिर भी इतना तो चाहेगा ही कि मालकिन भी उसे समझे।सिर्फ दो वक्त का खाना और दो वक्त वॉक पर ले जाने की जिम्मेदारी ही न निभाए।पति और पत्नी दोनों एक दूसरे के पूरक होते हैं। हम कुंडली में 32 गुण मिलाते हैं। यह गुण जातक की राशि के अनुसार होते हैं।उम्र के विभिन्न पड़ाव पर लड़का और लड़की के गुण कितने बदल गए, वो तो पंडित का बाप भी नहीं समझ सकता।असल बात नजरिए की है।हम औरत को किस नजरिए से देखते हैं। औरत पत्नी, मां, बहन, साथी कोई भी हो सकती है।अगर हम औरत को दासी के नजरिए से देखते हैं तो पति को एक नौकरानी, गुलाम, दासी चाहिए।लेकिन पति और पत्नी दोनों एक दूसरे को एक दूसरे के पूरक के रूप में देखें तो मदद का एक हाथ हमेशा खड़ा मिलेगा।और यह बिना कहे ही होता है। मिसाल के लिए अगर पत्नी देर से सोकर उठी है, पेट में दर्द या कमर में दर्द, सिर में भारीपन की शिकायत कर रही है तो पति को कहना चाहिए कि तुम आराम करो, मैं कुछ काम निपटा देता हूं।पति को समझना चाहिए कि पत्नी को पीरियड आने वाला है या आ चुका है।इसी तरह अगर पति घर पर देर रात तक काम करे या ऑफिस के काम में उलझा हो तो पत्नी को भी उसका सहारा बनना चाहिए।पत्नी को बुखार होने पर पति को छुट्टी लेनी चाहिए। इसलिए नहीं कि वह उसका हाथ पकड़े रहे, बल्कि इसलिए कि पत्नी को किसी भी चीज की जरूरत पड़ने पर पति उसके पास हो।पति-पत्नी का रिश्ता कठपुतली के उन दो धागों से बंधा होता है, जिनमें से किसी के भी खिंचने पर दर्द का आभास हो और दोनों मिलकर उस असंतुलन को संतुलित करें। लोग ऐसे वफ़ा नहीं करते। वे वफ़ा चाहते हैं। आप उनके साथ वफ़ा नहीं करेंगे तो वे भी वक्त आने पर बेवफाई में उतर आएंगे।ठीक वैसे ही जैसे बच्चे कभी गुनाह नहीं करते। परिवार, समाज उन्हें गुनाह का सबक सिखाते है। अगर उन्हें वो मासूमियत, वह बचपन नहीं मिलेगा तो वे गुनाह करेंगे ही। इसमें दोष उनका नहीं, हमारा है।असल में हम एरोगेंट हो गए हैं। हमें लगता है कि हम ही सही हैं। दूसरे का पक्ष हम सुनना ही नहीं चाहते। सड़क पर चलने वाले कार वाले की हमेशा यही चाहत रहती है कि उसके सामने की पूरी सड़क खाली हो।आधुनिक नारीवाद इसी का दूसरा रूप है, जो अतिश्योक्ति और अपवादों से भरा है। माना कि हम जैसी औरतें वर्षों से पुरुषप्रधान समाज के दमन को झेल रही हैं।लेकिन इसका यह मतलब भी नहीं कि इन बेड़ियों से आजाद हुईं तमाम महिलाएं पुरुषों को गुलामी के चश्मे से देखने लगें।केवल बदलाव ही काफी नहीं होता। बदलाव के साथ व्यवस्था, प्रणाली और नजरिया भी बदलना चाहिए।इस तरह के एकपक्षीय रवैये से बदलाव संतुलित नहीं, बल्कि असंतुलित होता है।
सही है स्नेहा, इसमें गलत क्या है। आज की जनरेशन की लड़कियों को एक पालतू कुत्ता ही चाहिए। हम बच्चों के अच्छे भविष्य के लिए बेहतर शिक्षा प्रदान करते हैं, लेकिन बच्चे नहीं समझ पाते। अंग्रेजी माध्यम में पढ़ी हुई लड़कियाें का दिमाग हमेशा सातवें आसमान पर ही रहता है। अभी कुछ दिनों पहले 3-4 लड़कियों से मुलाकात हुई थी। वे किसी को गालियां दे रही थी, उनसे कहा कि हिंदी में ही गालियां दे दो अगर देना ही है तो। उनका जवाब था कि हिंदी में गालियां अच्छी नहीं लगती, अंग्रेजी मे ठीक लगती है। और तो और वे ये भी कह रही थीं कि हमें अगर कोई गाली दे तो अंग्रेजी में दे सकता है Like BC, MC। हिंदी में नहीं। बताअो अब क्या कहें ऐसी लड़कियों का। फिर तो उन्हेें पति भी पालतू ही चाहिएगा।
ReplyDeleteसंतुलित, और शानदार. बराबरी की लड़ाई होनी चाहिए, अभी के अत्याचार को उल्टा कर देने की नहीं.
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