इसके बारे में जो लिखू वो मेरे लिए कम होगा। टीना ,हमारी हक्कू मेरी छोटी बहन ,जिसने मुझे न सिर्फ बड़े होने का मान दिया बल्कि अपनी उपलब्धियों से भी हम सब का मान बढ़ाया है। नर्सरी क्लास से जो क्लास में फर्स्ट आने का सिलसिला शुरू हुआ। वो आज तक जारी है ,हर एग्जाम को पास किया ,फिर वो कम्पेटेटिवे ही क्यों न हो। जो बात सबसे ज्यादा मान कराती है वो ये की आज तक किसी भी टूशन का सहारा नहीं लिया। फिर वो P . E.T ही क्यों हो। वेटिंग सीट में एडमिशन नहीं लिया क्युकी डोनेशन मांग रहा था कॉलेज। उसने अपना सब्जेक्ट बदल लिया। लडकिया वाकई समझदार होती है ,लेकिन इतनी ज्यादा ये नहीं पता था। जिस राज्य में गयी वहाँ के कॉलेज ,और यूनिवर्सिटी टोपर रही। गोवा में जॉब किया। अब पीएचडी की स्कालरशिप मिली है नॉर्वे में ,जिसको पूरा करने में रात दिन एक कर दिए है।
ये सब लिखने का शायद कोई मतलब नहीं होता ,लेकिन आज रहा नहीं गया। जब मेरे मोबाइल में आये एक मैसेज ने मुझे और प्राउड फील कराया। हमारी समाज के महा सभा ने टीना को सम्मानित करने के निर्णय किया है ,जो हम सब के लिए बहुत ख़ुशी का पल है। उसने इस सम्मान को लेने के लिए मुझे मनोनीत कर ,आज मुझे बहुत बड़ा बना दिया ,बड़ी बहन होना और ये बड़ापन दोनों में फर्क है..मम्मी की ख़ुशी अपनी जगह है ,इससे ज्यादा ये की जिन जिन को पता चल है ,वो ज्यादा खुश है ,कई रिस्तेदार ऐसे भी है जिनको उसके इस अचीवमेंट की जानकारी नहीं थी ,वो आश्चार्य कर रहे है की हमे बताया क्यों नहीं। हम लोगो ने कभी इस को उस तरह लिया नहीं ,या कहे की फुर्सत ही नहीं मिली ,रोजमर्रा की ज़िंदगी के तामझाम से। माँ और मैं आपस में उसकी हर उपलप्द्धि को एन्जॉय कर लेते है ,आज पापा होते तो उनका सीना न जाने किता चोडा हो जाता। उनको अपनी दोनों बेटियो पे नाज़ था है और हमेशा रहेगा। ये जो कुछ भी हम दोनों है आज उनकी ही बदौलत,उन्होंने कभी हम दोनों को बोझ नहीं समझा ,बल्कि हमें अपने रास्ते चुनने की आज़ादी दी। शायद यही कारण है ,की आज टीना और में अपनी ज़िन्दगी को अपनी तरह से ज़ी रहे है। टीना की इस उपलब्धि के लिए मेरी तरफ से बहुत बहुत बधाई ,और शुभ कामनाये। माँ का बहुत सारा प्यार और आशीर्वाद। युही तरक्की करो ,खूब पढ़ो आगे बड़ो ,मस्त रहो।हमेशा खुश रहो।
एक हज़ारो में मेरी बहना है!
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