मां मुझे इस दिल्ली से दूर ले जा
और ले जा उस बड़े दिलवाली दिल्ली में
जिसके दिल में जिस्म की भूख ना हो
सीने में वासना की आग ना हो
और बलात्कार का वो काला दाग ना हो
बस माँ मुझे ले चल
मैं ही नहीं तू भी बच जाएगी
ये दिल्ली हमें नोंच नोंच के नहीं खाएगी
मैं तो अभी बहुत छोटी हूं
मुझे छुपा ले अपने आंचल में
कहीं इस दिल्ली की गन्दी नज़र मुझपे ना पड़ जाये
कहीं मेरा आने वाला कल आने से पहले ही ना सड़ जाये
माँ तुम उठती क्यों नहीं?
क्या बड़े दिलवाली दिल्ली बहुत दूर है?
या वो दिल्ली भी इतनी ही क्रूर है?
क्या इस दिल्ली के लोग भी उस दिल्ली में रहने लगे
मां अब तेरी आंखों से आंसू क्यों बहने लगे?
मां ये तू क्या कह रही
बड़े दिलवाली दिल्ली कहीं है ही नहीं
दिलवाली बस एक छवि ही रह गई
अब दिल्ली का दिल आवारा हो गया
और इसे लगता है हर लड़की का जिस्म हमारा हो गया
मां तुझे पता था दिल्ली अब हैवान है
यहाँ कोई इंसान नहीं सब शैतान हैं
फिर भी तूने मुझे पैदा किया
अपनी ममता का क्यों सौदा किया
अपनी दिल्ली को मैंने इन सभ्य बलात्कारियो को हार दिया
मां तूने मुझे कोख में ही क्यों न मार दिया?
कहने वालों का कुछ नहीं जाता, सहने वाले कमाल करते हैं। कौन ढूंढे जवाब ज़ख्मों के, लोग तो बस सवाल करते हैं!
Monday, April 22, 2013
Friday, April 19, 2013
हर औरत रेप की हकदार है ?
रेप होते नहीं कराए जाते हैं। दिल्ली के गांधीनगर इलाके में रेप और अप्राकृतिक कृत्य की शिकार पांच साल की बच्ची के पिता से पुलिस ने यही कहा। थाने में रिपोर्ट कराने गए बचची के पिता से कहा गया, ‘शुक्र करो कि तुम्हारी बेटी जिंदा है। चाय-नाश्ते के लिए 2000 रुपए रखो और घर जाकर बच्ची का इलाज करवाओ।’
मीडिया में इस शर्मनाक बयान को पढ़ने वाले किस भी सजग व्यक्ति के जेहन में तहलका का वह स्टिंग ऑपरेशन आएगा, जिसमें रेप के मामलों को लेकर दिल्ली पुलिस की अलिखित गाइडलाइन सामने आई थी। सिर्फ दिल्ली पुलिस ही नहीं, देश के तकरीबन हर राज्य की पुलिस दुष्कर्म के मामलों पर इसी तरह की शर्मनाक दलीलें पेश करती है। इन दलीलों को सुनकर सभ्य, सुसंस्कृत समाज का कोई भी व्यक्ति यही कहेगा कि ऐसे में देश की हर स्त्री के साथ दुष्कर्म होना चाहिए। हर औरत जन्म से ही रेप की हकदार है, देखिए क्यों ?
1. वह हमेशा सलवार-कमीज, साड़ी, दुपट्टे में नहीं रहती
लड़कियों को ‘यहां तक, नहीं यहां तक....’ इस यहां की कोई हद नहीं है। यह तालिबानी नैतिकता आजादी के बाद की तीसरी पीढ़ी के हर व्यक्ति के दिमाग में छाई रहती है। पुलिस ही नहीं, अधिकांश लोग मानते हैं ‘लो कट’ दिखावा है, पुरुषों को रेप के लिए उकसाने का जरिया है। स्कर्ट पहनना भी इसी तरह की उकसाने वाली हरकत है। यानी औरत बाहर न जाए। काम न करे। वह सलवार-कमीज, साड़ी, दुपट्टे में घर पर बैठी रहे। औरत खुद को जितना दिखाएगी, भेड़िए उसकी ओर ज्यादा लपकेंगे। यानी घर, सड़क, स्कूल-कॉलेज हर जगह भेड़िए बैठे हैं। अपने शिकार की खोज में। उन पर कोई रोक नहीं है। कोई रोक नहीं लगा सकता, क्योंकि रोक लगाने वाले भी वही भेड़िए हैं। इन भेड़ियों के पक्ष में बहुसंख्यक पुरुष आबादी है। कानून भी इनके सामने बेबस है। आप पुलिस में शिकायत कीजिए। रिपोर्ट नहीं लिखी जाएगी। रिपोर्ट लिख ली गई तो कोर्ट में कमजोर केस पेश किया जाएगा। भेड़िया छूट जाएगा। पहले से और मजबूत। मीडिया के लिए रेप एक मसालेदार फिल्म की तरह है। उससे भी ज्यादा चीर-फाड़ दिखाने वाला, जो कि अदालत में जिरह के दौरान होना है। रेप के बाद औरत का जीवन इस्तेमाल की गई चीज बनकर रह जाता है। भेड़ियों की विरासत बन जाता है। लेकिन पांच साल की बच्ची ? वह भी तो चारा बन रही है ?इस पर पुलिस और भेड़िया समुदाय का क्या जवाब है ?
2. 10 लड़कों के साथ, यानी बदनाम !
अगर किसी लड़की को सरेराह सड़क चलते एक गाड़ी में बैठे 10 लड़के उठाकर ले जाते हैं। बारी-बारी से रेप करके सड़क पर फेंक देते हैं। इस पर सबसे पहले पुलिस कहेगी, ‘जरूर उनमें से किसी लड़के के साथ वह सोई होगी। वरना कोई यूं थोड़े ही किसी लड़की को उठाता है।’ मीडिया भी चीख-चीखकर इस बयान को दोहराएगी। समाज इसे सच मान लेगा। आरोपी पकड़े जाएंगे। छूट भी जाएंगे। औरत ‘इस्तेमाल’ जो हो चुकी है। उस पर सबका हक है। वह मासूम नहीं है। नादान भी नहीं। उसे ‘संबंध’ के बारे में सब पता है। वह बदनाम है। कोठे पर बैठने लायक है। कोई भी उसके साथ कुछ भी कर सकता है। तो फिर हर लड़की, हर बच्ची बदनाम है। सबको कोठे पर बिठा दो।
3. दारू पी, यानी रेप तो होगा ही
अगर किसी लड़की ने पार्टी या डिस्को में कुछ अजनबियों के साथ शराब पी ली तो फिर उसका रेप होना तय है। शराब पीने के बाद पुरुष भेड़िया हो जाता है। लड़की देखते ही पागल। नहीं सोचता कि वह क्या करने जा रहा है। गलती लड़की की है। पुलिस भी यही कहेगी, मीडिया और समाज भी। वह बदचलन है। क्यों दारू पी उसने ? यह तो भेड़ियों का काम है। यह कोई नहीं देखेगा कि शराब या नशीली वस्तु उसे धोखे से या जबर्दस्ती पिलाई भी जा सकती है। पुलिस यह मानकर कोर्ट में केस पेश करेगी कि लड़की तो आदतन अजनबियों के साथ शराब पीने की आदी है। वह ऐसे ही किसी मौके पर ‘संबंध’ भी बना चुकी होगी। यानी ‘इस्तेमाल’ हो चुकी होगी। तो फिर भेड़िए की क्या गलती ? वह तो रेप करेगा ही ना ? औरत को दारू नहीं पीनी चाहिए। उसे ऐसी किसी जगह नहीं होना चाहिए, जहां भेड़िए दारू पीकर टल्ली हो रहे हों।
4. जब मां ही ऐसी हो तो...
हुजूर, मां की उम्र 40 पार है। पति ने उसे छोड़ दिया है। अकेली बेटियों के साथ रहती है। घर पर एक खास व्यक्ति का आना जाना है। वह व्यक्ति रात को भी घर पर रह जाता है। औरत है। उसकी भी अपनी इच्छाएं हैं। क्या करे ? मोहल्ले में पांच गवाह (असल में ये भेड़िए हैं, जिन्हें शिकार नहीं मिल सका) कोर्ट में इसे दोहराने को तैयार हैं कि औरत बदनाम है। ऐसे में दोनों बच्चियां भी मां के रास्ते पर चली गईं। उनके साथ रेप होना ही था। दोषी मां है। उसने बेटियों को जन्म क्यों दिया ?
5. उसने रेप करवाया होगा
भेड़िया समुदाय जिसमें पुलिस भी शामिल है, सोचती है कि बड़े घरों की औरतें आजाद ख्याल होती हैं। वहां फ्री सैक्स होता है। कुछ भी पहनो, कहीं भी आओ-जाओ, कितनी भी देर तक घूमो। घर पर बच्चे भी आजाद ख्याल बन जाते हैं। उन्हें ‘मुंह मारने’ की आदत पड़ जाती है। भेड़िया समुदाय तो मासूम है। उसकी भी अपनी इच्छाएं हैं। इधर पल्लू सरका कि भेड़िया होश खो बैठेगा। फिर तो रेप होना तय है। अगर औरत निम्न परिवार की हो तो भी उसे बन-ठनकर निकलने का हक नहीं है। वह तो खुद को दिखा रही है। कोई आए और उसे लूटकर चला जाए। बदले में नोट की गड्डी थमा जाए। गरीबी रेप भी करवाती है। अगर किसी ने कम पैसे दिए तो रेप की रिपोर्ट लिखवा दो। कोर्ट में केस नहीं टिकेगा, क्योंकि पुलिस खुद भेड़िया बिरादरी की है। इतना सजकर तू रात को क्या करने गई थी? घर पर पति, बाप, भाई क्या काम करते हैं ? ये जवाब अनजाने में खुद भेड़ियों को बचाने वाले साबित होते हैं।
6. रिपोर्ट झूठी है
लड़की ने रेप की रिपोर्ट लिखवाई ? उसे शर्म नहीं आती ? क्या उसे पता नहीं कि कोर्ट में उसकी इज्ज्त तार-तार होने वाली है ? क्या उसे पता नहीं कि समाज उसे ‘इस्तेमाल’ की चीज बना देगा ? वह भेड़ियों का आसान शिकार बनेगी ? उसे सबकी ‘भूख’ मिटानी होगी ? इतना सब जानने-समझने के बाद भी रिपोर्ट करवाई है तो मकसद पैसा कमाना ही होगा। वह अपना सौदा करना चाहती है। आरोपी मालदार है। रसूखवाला है। औरत ही बदचलन है। ‘सोना’ तो उसका पेशा है। वह वैश्या है। खामख्वाह एक ‘मासूम’ (भेड़िए) पर झूठा आरोप लगा रही है। कोर्ट में साबित किया जाए इस झूठ को। मीडिया बार-बार दोहराएगी इसे। झूठ सच साबित हो जाएगा। औरत ‘सार्वजनिक रूप से उपलब्ध’ हो जाएगी।
तो महिलाओ – तैयार हो जाओ रेप के लिए। आपका रेप होना तय है, क्योंकि भेड़िया समुदाय यही चाहता है।
पढ़ें तहलका की 14 अप्रैल 2012 की स्टिंग : http://archive.tehelka.com/ story_main52.asp?filename= Ne140412Coverstory.asp
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