पुलिस आला कमान के नाम एक खुला खत
लैटर तो मैंने बहुत लिखे हैं, अपने बचपन से न जाने कितने और कितनों को,कुछ लोगों ने तो आज भी शायद मेरे ख़त संभाल के रखे होंगे,आज किसी प्रेस के एडिटर को नहीं,न ही किसी मित्र को ,बल्कि सोचा,जबलपुर के पुलिस आला कमान साहब को एक खुला ख़त लिखूं.............
मुझसे भले ही ज्यादा अच्छे शब्द, शायद ही निकले, पर कोशिश करने में क्या हर्ज़ है .जनाब,
आपने एक अच्छा काम किया है,पिछले दिनों,जो आपने सभी पुलिस वालो की परेड करवा दी.जी, मैं सड़कों में दिन-रात गश्त की बात कर रही हूं.जिन्हें नहीं पता उन्हें बता दूं कि हमारे यहाँ पिछले हफ्ते सड़कों पर लूट की घटना, एक-साथ तीन जगहों पर हुई,वैसे यह हमारे यहाँ हमेशा होती ही रहती है,अगर आप महिला हैं,तो उन्हें अपने जेवर पहन के नहीं निकलना चाहिए या अपने पर्स को संभाल के रखना यह उनकी जिम्मेदारी है.यहाँ आए-दिन कभी भी कोई भी बाइक सवार खुली सड़कों पर आते-जाते महिलाओं से पर्स छीन कर ले भागता है खासतौर पर काली बाइक पर सवार.इस तरह की घटना यहाँ के आम घटनाओं में शुमार माना जाता है.जी,....तो मैं बता रही थी कि उस दिन भी तीन लूट की वारदात एक साथ घट गईं
आला कमान ने सारे थाने की अफसरों की मीटिंग बुलाई और उनको गश्त लगाने के फरमान सुना दिए,पहले दिन तो गजब की पेट्रोलिंग हुई,पुलिस के वाहनें तेजी से सड़को पर आवाजाही करते दिखी.दूसरे दिन उनकी गति में थोड़ी कमी दिखी,शानिवार को दिन में तीन या चार बार,कल रविवार था इसलिए शायद पुलिस वालों को भी छुट्टी चाहिए थी,कुछ ज्यादा ही आराम हो गया,लेकिन अब आज एक भी बार कोई टाइगर वेन नज़र नहीं आई,जो दिखी भी तो कहीं सुस्ताते हुए जैसा.
सही भी है,आखिर कब तक मनचलों की तलाशी लेते रहते ?आखिर वो सब भी तो इंसान ही हैं.थकना भी स्वाभाविक है.
जनाब आपको यह जान कर हैरानी होगी कि इस दौरान मेरी एक पुलिस वाले से बात हुई ....जब उनसे पूछा कि ये क्या हो रहा है? कब तक चलेगा ? क्या ऐसे में लूटेरे पकड़ लिए जायेंगे?आपको यह जानकार आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि उस पुलिस वाले ने क्या जवाब दिया....उसने बड़े ही विनम्र स्वर में बताया कि मैडम,अब आप ही बताइए,क्या वो लूटेरे पागल हैं,जो खुले आम अब तक घूमेंगे,जब तक हमें पेट्रोल खर्च करना है,तब तक तो करेंगे ही.दो दिन की कहानी है..बस, आप देखना उसके बाद ,जो जैसे थे वो वैसे ही हो जायेंगे,ऐसे अगर सब लूटेरे घुमने लगे तो हो गयी,हमारी नौकरी ?
अब आप ही बताइए कि क्या हुआ?क्या सभी महिलाओं ने अपना जेवर पहनना छोड़ दिए या मनचलों ने सड़कों पर बाइक भगाना छोड़ दिया.आज भी बाइक पर चार लोगों की सवारी हो रही है,यातायात पुलिस अंधी बनी बैठी रहती है ,आपके पुलिस के लोग सिर्फ खाना पूर्ति कर रहे होते हैं,सड़को पर आवारापन पूरी तरह से हावी है.आपकी पुलिस की इतनी मेहनत का क्या नतीजा हुआ ?सिर्फ ये की इन चार दिनों में कोई लूट की घटना नहीं हुई,तो इस बात पर आपके लोगों को तमगे दिए जाने चाहिए,इन्होनें बहुत अच्छा काम किया.
जनाब,आप लोगों के पास भोपाल, रायपुर की तरह काम करने का जज्बा क्यों नहीं है,न तो आपके पास और न ही यातायात पुलिस के पास.आज भी कोई भी,कहीं भी अपनी गाडी पार्क कर रहा है.क्योंकि सड़कें इसी काम के लिए बड़ी बनाई गयी है.
इस हालत में अगर कोई लूट की घटना हो जाए और आम जनता कोशिश भी करे कि उस लूटेरे को पकड़ लें तो उनकी हिम्मत नहीं होती....क्योंकि आपके जबलपुर में ,आपके क्यों मेरे जबलपुर में ...कोई लॉ एंड आर्डर नाम की कोई चीज ही नहीं है.हर कोई बेफिक्र है,उसको मालूम है कि यहाँ कोई कुछ नहीं सकता,जिनका सामान गया,वो तो गया..भूल जाओ,लेकिन जो आज भी सड़को पर है उनका क्या?आप जब सड़को पर आने-जाने वालों की सुरक्षा नहीं कर सकते तो आप कैसे कह सकते हैं कि आप किसी बड़े केस को आसानी से सुलझा लेंगे.
अभी बारिश का बढ़िया मौसम है,कोई जरुरत नहीं है कि मुंह बंद करके सड़कों पर लोग चलें,लेकिन इसके बावजूद मनचले मुंह ढंक के घूम रहे हैं ,लडकियां भी घूम रही है,उन्हें कोई कुछ कहने वाला ही नहीं है,बाइकर गैंग के इस वारदात से आज पुलिस होश में आई.इसके पहले क्यों नहीं आई ? आज जिस तरह से आपके सहकर्मी दिन रात गाडियां घुमा रहे हैं .उससे इस समस्या का हल नहीं होगा,आपको सड़कों के लिए नियम कानून बनाने पड़ेंगे ?तभी आपकी इस मेहनत का कोई औचित्य है वरना पुलिस कर्मियों की परेड करवा के आपने कोई बहुत बड़ा काम नहीं कर लिया है ,उनको यूँ ही भगा कर आप भी पीठ पीछे हंसी का पात्र बने हैं,मेरे इस बात को अन्यथा न लेते हुए,आप इस पर गौर करें,और सबसे पहले जब तक सड़कों के लिए बने नियमों का,पालन नहीं करवाएंगे तब तक आपकी मेहनत बेकार है.इसके लिए आम जनता को भी साथ में लीजिये.उनको भी जरा कड़ा डोज दीजिये,तभी वो सही रास्ते पर आएंगे.आपको जनता के साथ उन बाज़ार वालों को भी अपने साथ लेना होगा,जो सड़को को नज़रंदाज़ करते हुए सिर्फ अपनी सोचते हैं,आप ये सब कर सकते हैं ,सिर्फ एक शिद्दत के साथ सब को अपने साथ ले लीजिये,शायद इस बहाने पुलिस का डर आम जनता के मन से जाये और वो आपको भी अपना समझे ...वैसे ये बात आप जल्दी समझ जायेंगे ,क्योंकि आप खुद आकलन करें कि लूटेरो के भूमिगत होने के बाद ,आपके हाथ क्या लगा .